ये पंछी जंगल से है उतना दूर
जितना दिल्ली से होगा आंध्रा दूर
हाथ रखूं दिल पे अपने तो छू लूँ
कितना दूर है घर तेरा, कितना दूर ?
पहली बार चढ़ा है फोन का भी बिल
पहली बार लगा है, कोई हुआ दूर
ठीक से रहना अच्छा खाना पीना
सोच में मत रहना मैं तुम से हुआ दूर
मुझ से दूर सफ़र है, और थोड़ा है
कुछ ये ज़ियादा नहीं लगता थोड़ा दूर
कब बैठेगा तू वापस दिल्ली को
कब होगा मुझ से ग़म का साया दूर
मैसेज करना मुझे ख़ाली होना जब
ले के चलना था तुम को थोड़ा दूर
पास बिठाना अपने हिफ़ाज़त करना
पर जब वो जा कह दे, हो जाना दूर
मुझ को प्यार नहीं कर सकता बस में
फिर तेरा ग़ुस्सा और तेरा पैसा दूर
उस का वापस आना फिर मुमकिन नईं
जिस को पता दे के मेरा भेजा दूर















