सहरा कभी हो जाए तर मतलब नहीं बनता

हम जैसे दीवानों में डर मतलब नहीं बनता

जो इश्क़ करते है वो आवारा ही रहते है
बंजारों का हो अपना घर मतलब नहीं बनता

वा'दा किया था एक लड़की को बहुत पहले
अब संग तेरे हो सफ़र मतलब नहीं बनता

मतलब नहीं बनता तेरा तू कुछ कहें मुझे गर
तू साथ मेरे क्यूँ है गर मतलब नहीं बनता

हम रोज़ पूछेंगे हमारा हाल वा'दा था ना
फिर आज मैं ही लूँ ख़बर मतलब नहीं बनता

सर पेड़ के नीचे छुपाओगे अगर अपना
बन जाएगा अंबर पे घर मतलब नहीं बनता

जिस
में दिवाने हो तेरे और तू लुटेरी हो
बस जाएगा वो भी नगर मतलब नहीं बनता

— BR SUDHAKAR

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