मुझ पे आँचल मुझ पे है साया वतन
मेरा पहला प्यार है मेरा वतन
ये किसी ने पूछा सब से प्यारा क्या
मैं ने बोला ये वतन मेरा वतन
हल्की ख़ुशबू, दश्त प्यारे और सबा
हैं बताते आ गया अपना वतन
हाल तेरा कूचा कूचा पूछेगा
देखा परदेसी? ये है मेरा वतन
मेरे अपने रोते हैं मेरे लिए
मैं भी रोता हूँ मगर कहता वतन
जिस की मिट्टी घाव पे मरहम बने
बस वो भारत है जो है ऐसा वतन
— BR SUDHAKAR















