उसे देखा तो ख़ुश इतना हुआ मैं
लगूंँ बच्चा कोई हँसता हुआ मैं
कुई लिक्खो मुझे पूरा करो अब
किसी मिसरे सा हूँ अटका हुआ मैं
वो जिस के शे'र पर मैं दाद देता
उसी की बात पर रुस्वा हुआ मैं
वफ़ा का भी मिरी अब ये सिला है
मुहब्बत कर के भी तन्हा हुआ मैं
मैं ख़ुद को भूल आया था कहीं पर
किसी के पास हूँ रक्खा हुआ मैं
किसी को मैं मुयस्सर भी नहीं था
किसी के वास्ते ज़ाया' हुआ मैं
— Sunny Seher















