मिरी दिल से शिकायत है मुझे तुम सेे मुहब्ब्त है
कहो क्या दिल की क़ीमत है मुझे तुम सेे मुहब्ब्त है
तुम्हें कुछ याद है कैसे गले लगती थी कहती थी
मुहब्बत ता क़यामत है मुझे तुम सेे मुहब्ब्त है
बड़ा अल्हड़ था मैं किसके लिए ठुकरा दिया तुमको
सुनो ना कुछ ग़नीमत है, मुझे तुम सेे मुहब्ब्त है
इसी इक कशमकश में ज़िंदगी भर हम रहे तन्हा
उसे मुझ सेे मुहब्बत है मुझे तुम सेे मुहब्ब्त है
मुझे इज़हार करना भी नहीं आता, तुम्हीं कह दो
मुझे तुम सेे मुहब्ब्त है मुझे तुम सेे मुहब्बत है
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