तुम हो कैसी मकान कैसा है
बिन मेरे ये जहान कैसा है
जो लगा है तुम्हारी गर्दन पे
ये बताओ निशान कैसा है
तुम ने छीना था मुझ से बेटा जो
वो हमारा अमान कैसा है
भर के झोली मिरे हुज़ूर अपनी
पूछते हो किसान कैसा है
एक औरत तलक नहीं मिलती
फिर ये तुझ को गुमान कैसा है
— umar udas















