नेता को ही खाते नेता
अपनी पीठ बजाते नेता
सब से सच्चा सुच्चा मैं हूँ
सब को राग सुनाते नेता
राजे हैं ये इस कलजुग के
पैसा ख़ूब कमाते नेता
कपड़े पहने लगते फक्कड़
कैसा रूप बनाते नेता
जनता की है फ़िक्र उन्हें ही
बस ये झूठ उगाते नेता
— Vikas jain "vyakul"
अपनी पीठ बजाते नेता
सब से सच्चा सुच्चा मैं हूँ
सब को राग सुनाते नेता
राजे हैं ये इस कलजुग के
पैसा ख़ूब कमाते नेता
कपड़े पहने लगते फक्कड़
कैसा रूप बनाते नेता
जनता की है फ़िक्र उन्हें ही
बस ये झूठ उगाते नेता
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling