सभी के साथ हम यारी नहीं करते
मिले दिल फिर तो ग़द्दारी नहीं करते
हवाओं से मोहब्बत करने वाले हम
चराग़ों से वफ़ादारी नहीं करते
ग़लत होंगे अगर तो खुल के बोलेंगे
किसी की हम तरफ़-दारी नहीं करते
कहाँ से दुख दरख़्तों का वो समझेंगे
जो अपने घर शजर-कारी नहीं करते
— Shubham Rai 'shubh'















