करूँँगा मैं क्या अब बताता नहीं हूँसो अब पीठ पर ज़ख़्म खाता नहीं हूँसभी लूट जाए भले आज कल परकिसी दर पे मैं सर झुकाता नहीं हूँ— Shubham Rai 'shubh'