ek muddat ho gaii yaar chale bhi aao | एक मुद्दत हो गई यार चले भी आओ

  - Aatish Indori

एक मुद्दत हो गई यार चले भी आओ
एक मुद्दत रहा है प्यार चले भी आओ

ज़िंदगी साथ तुम्हारे थी तो थी इक त्योहार
हिज्र ने समझा दिया यार चले भी आओ

कुछ कहा तो नहीं दीवार उठा ली लेकिन
अब गिराओ भी ये दीवार चले भी आओ

अक़्ल गर होती तो क्यूँँ शर्त लगाता तुम सेे
जीत कर भी गया हूँ हार चले भी आओ

जो परेशाँ हैं तुम्हें उन पे तरस आता है
जान-ए-जाँ मैं भी हूँ बीमार चले भी आओ

  - Aatish Indori

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