यूँँ नहीं था कि सवालात से मुँह मोड़ लिया
ज़िंदगी ने मेरी हर बात से मुँह मोड़ लिया
जो ज़रूरी है वो सब कुछ तो मिला है मुझ को
इस लिए मैं ने शिकायात से मुँह मोड़ लिया
ख़ूब प्यासे भी थे और ख़ूब सदाएँ भी दीं
देर से बरसा तो बरसात से मुँह मोड़ लिया
रूठ तो दिल भी गया जब से मोहब्बत रूठी
इस ने हर तरह के जज़्बात से मुँह मोड़ लिया
— Aatish Indori















