याद आती है किसी की आजकल
दिल नहीं लगता कहीं भी आजकल
अब किसी की भी इसे परवाह नहीं
दिल पे रहती है ख़ुमारी आजकल
जान की बाज़ी के जैसी है मियाँ
खेलना ख़्वाबों की होली आजकल
आसमाँ पर घर बनाना था मगर
छायी है काली अँधेरी आजकल
तुम को बाहों में छुपा लूँ आओ है
बर्फ़ से भी सर्द सर्दी आजकल
— Ajeetendra Aazi Tamaam















