धूप ये अठखेलियाँ हर रोज़ करती हैएक छाया सीढ़ियाँ चढ़ती उतरती हैये दिया चौरास्ते का ओट में ले लोआज आँधी गाँव से हो कर गुज़रती है— Dushyant Kumar