भटकते हुए दर-ब-दर ज़िंदगीकरे ज़िंदगी भर सफ़र ज़िंदगीहैं लाखों ठिकाने मगर जाने क्यूँचुने मौत को अपना घर ज़िंदगी— Ajeetendra Aazi Tamaam