logon ne bahut chaaha apna sa bana daalen | लोगों ने बहुत चाहा अपना सा बना डालें

  - Abdul Hameed

लोगों ने बहुत चाहा अपना सा बना डालें
पर हम ने कि अपने को इंसान बहुत रक्खा

  - Abdul Hameed

Aadmi Shayari

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    अपनी हस्ती का भी इंसान को इरफ़ांन हुआ
    ख़ाक फिर ख़ाक थी औक़ात से आगे न बढ़ी
    Shakeel Badayuni
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    इश्क़ क़ैस फरहाद रोमियो जैसे ही कर सकते हैं
    हम तो ठहरे दस से छह तक ऑफ़िस जाने वाले लोग
    Vashu Pandey
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    ग़म-ए-हयात में यूँ ढह गया नसीब का घर
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    वबायें आती गईं और लोग मरते गए
    हमारे गाँव में था ही नहीं तबीब का घर
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    Ashraf Ali
    वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
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    Dushyant Kumar
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    अगर हुकूमत तुम्हारी तस्वीर छाप दे नोट पर मेरी दोस्त
    तो देखना तुम कि लोग बिल्कुल फ़ुज़ूल-ख़र्ची नहीं करेंगे
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    मेरी ख़ुशियों को आने जाने में
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    Vishal Singh Tabish
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    रो रहा है बशर मगर देखो
    ज़िन्दगी को रफ़ू नहीं करता
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    Bashir Badr
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    आप की सादा-दिली से तंग आ जाता हूँ मैं
    मेरे दिल में रह चुके हैं इस क़दर हुश्यार लोग
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