Darpan
Darpan
Ghazal

साहिल से तो हर दरिया का पानी गहरा दिखता है,

अंदर जा कर देखो भाई, बाहरस क्या दिखता है ?

आँखों पर पट्टी बंधी है वो भी ऐसे बंधी है,
सब को लगता है अँधा हूँ जबके पूरा दिखता है

इक लड़की से मैं ने पूछा, बता बता कैसा दिखता हूँ?
सौ सौ नुक्स निकाले और फिर बोली अच्छा दिखता है

मुझ को अपने पास बिठाकर मेरी मुश्किल समझो यार,
दूर खड़े होकर मत बोलो- "पागल लड़का दिखता है"

कभी कभी गार्डन के दरवाज़े पे याद आती है वो,
और फिर सारे फूलों में उस का ही चेहरा दिखता है

जैसे देख रहे थे अब तक वैसे नइ.. ऐसे देखो,
देखा!!.. बोला था ना मैं ने ऐसे बढ़िया दिखता है

'दर्पन' इस रस्ते पे तुम इक ऐसा दरिया देखोगे,
जिस दरिया में डूबो तो आगे का रस्ता दिखता है

'दर्पन'

— Darpan

More by Darpan

Other ghazal from the same pen

See all from Darpan →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling