
कम मिली रोटी हमें फिर भी तसल्ली आज करली
मरते थे मरते रहेंगे कौन है जिस ने ख़बर ली
क़ाएदा क़ानून ये सब हम ग़रीबों के लिए है
अफ़सरों का कुछ न होगा जिस ने अपनी जेब भरली
— Abhi Gurjar
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