ऐसा मत कर वैसा मत कर उस से कहना छोड़ दिया
पता नहीं क्या सूझी मैंने ये दुख सहना छोड़ दिया
मेरे कहते रहने पर हम साथ रहें और फिर इक दिन
मैंने कहना छोड़ दिया और उसने रहना छोड़ दिया
As you were reading Shayari by Afkar Alvi
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