अँधेरी रात को ये मो'जिज़ा दिखाएँगे हम

चराग़ अगर न जला अपना दिल जलाएँगे हम

हमारी कोहकनी के हैं मुख़्तलिफ़ मेआ'र
पहाड़ काट के रस्ते नए बनाएँगे हम

जुनून-ए-इश्क़ पे तनक़ीद अपना काम नहीं
गुलों को नोच के क्यूँ तितलियाँ उड़ाएँगे हम

जो दिल दुखा है तो ये अज़्म भी मिला है हमें
तमाम उम्र किसी का न दिल दुखाएँगे हम

अगर है मौत में कुछ लुत्फ़ तो बस इतना है
कि इस के बा'द ख़ुदा का सुराग़ पाएँगे हम

हमें तो क़ब्र भी तन्हा न कर सकेगी 'नदीम'
कि हर तरफ़ से ज़मीं को क़रीब पाएँगे हम

— Ahmad Nadeem Qasmi

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