
कभी ये देखना कितनी वो अब दिलशाद रहती है
जो तन्हाई हमारे साथ तेरे बा'द रहती है
हमारा जन्मदिन कैसे तू यारा भूल जाता है
हमें तो दोस्तो की सिगरटें तक याद रहती है
— Aman Mishra 'Anant'
Other sher from the same pen
Shers of rahbar.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling