हुई तहरीर रौशन जब मिरे काग़ज़ पे वो आए

  - Amit Nandan Dev
हुईतहरीररौशनजबमिरेकाग़ज़पेवोआए
क़लमकीनोकपरदेखाचराग़ाँ-ए-सुख़नपाए
क़लमकाशोरसुनकरचश्म-ए-तरसेकहउठाकोई
येअंदाज़-ए-सुख़नदेखालगाजैसेअसदआए
हज़ारोंबारसोचाहैमगरइकबातअबठहरी
ग़ज़लमैंलिखरहाहूँयाग़ज़लख़ुदमुझकोकहजाए
हयात-ए-शौक़थीइकख़्वाबमेंगर्दिशरहीबरपा
क़लमचलनेलगीतोशे'रक़िस्मतकालिखाजाए
कभीमिस्रोंमेंउर्दूकागुहरचमकातोसोचाये
किसायाछोड़करशे'रोंमेंख़ुदमिर्ज़ाउतरआए
मैंउनकेहर्फ़चूमूँयामेरीआवाज़मेंआकर
मिराहरशे'रउनकेतर्जुमाजैसासुनाजाए
हज़ारोंशे'रलिखडालेमगरइकशे'रभीऐसा
जोउनकेनामसेदिलबेख़ुदीमेंडूबताजाए
सदाओंमेंबसीख़ुशबूग़ज़लकेरंगदिखलाए
क़लमजबछूगईकाग़ज़तोलफ़्ज़ोंमेंलहूआए
जोदुनियाहर्फ़-ओ-मानीकीगिरहसमझीवोदेखातो
ग़ज़लकेलफ़्ज़तशरीहोंसेपहलेहीमचलजाए
कभीमतलाकभीमक़ताकभीदिलकेमदारिज़में
क़दमग़ालिबकेआएतोमेराहरइकसफ़ाजाए
वहीजल्वावहीअंदाज़परइकफ़र्कबसइतना
मिरेदाग़ोंमेंशोख़ीहैजोउनकीतर्ज़पाजाए
मगरइकख़्वाबमेंअक्सरही'देव'अबशे'रकहताहै
असदजबमुस्कुरातेहैंमैंकहताहूँख़ुदाआए
  - Amit Nandan Dev
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