dil har kisi kii baaton men aata chala gaya | दिल हर किसी की बातों में आता चला गया

  - Daqiiq Jabaali

दिल हर किसी की बातों में आता चला गया
मैं तन्हा बैठ आँसू बहाता चला गया

जो दिल में था मेरे वो किसी ने नहीं सुना
जो भी मिला वो अपनी सुनाता चला गया

पूरी हो जाए तेरी कमी सिर्फ़ इस लिए
मैं तितलियों को दोस्त बनाता चला गया

इक तरफ़ा प्यार तो मैं निभा ही रहा था फिर
इक तरफ़ा दोस्ती भी निभाता चला गया

ख़ुद के ग़मों पे आँसू बहाना फ़िज़ूल था
मैं हँस के अपने ग़म को भुलाता चला गया

हम उसके दिल के बोझ को हल्का न कर सके
वो भी हमारा बोझ बढ़ाता चला गया

वो एक सच को यार छिपाने के वास्ते
वो और भी ज़्यादा झूठ बनाता चला गया

जब भी उसे भुलाने की कोशिश जो मैंने की
और भी ज़ियादा याद वो आता चला गया

घर में न था रिवाज़ 'अमित' झूठ कहने का
जो सच था वो ज़बान पे आता चला गया

  - Daqiiq Jabaali

Ghar Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Daqiiq Jabaali

As you were reading Shayari by Daqiiq Jabaali

Similar Writers

our suggestion based on Daqiiq Jabaali

Similar Moods

As you were reading Ghar Shayari Shayari