mohabbat ka yahaañ par vo fasaana chhod jaata hai | मोहब्बत का यहाँ पर वो फ़साना छोड़ जाता है

  - Ansar Ethvi

मोहब्बत का यहाँ पर वो फ़साना छोड़ जाता है
वो हिंदुस्तान में अपना ज़माना छोड़ जाता है

जहाँ लाखों करोड़ों लोग अब भी गुनगुनाते हैं
वो अल्लामा यहाँ अपना तराना छोड़ जाता है

उसे काफ़ी मोहब्बत है मगर वो कह नहीं पाता
वो उसको चाहता है पर जताना छोड़ जाता है

परिंदे पेड़ कटने पर भला फिर ख़ुश दिखें कैसे
यहाँ इंसान भी हँसना हँसाना छोड़ जाता है

नहीं दिखती हो बूढ़े बाप की जिनको परेशानी
वो बूढ़ा बाप फिर दुख भी बताना छोड़ जाता है

तेरा जो कुछ नहीं लगता तुझे उस सेे शिकायत है
यहाँ भाई भी रिश्तों को निभाना छोड़ जाता है

हमीं ने जिस के पैरों से कभी काँटे निकाले हों
वो ही फिर राह से पत्थर हटाना छोड़ जाता है

  - Ansar Ethvi

Udasi Shayari

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