हमारे हाथ में बच्चों ने तितलियाँ रख दीं

तो अपने हाथ की हमनें भी बर्च्छियाँ रख दीं

हुआ था ज़िक्र अचानक ही मौत का मुझ से
तड़प के उस ने मेरे लब पे उँगलियाँ रख दीं

रिहा किया है परिंदे को इस तरीक़े से
परो को खोल के, पैरों में बेड़ियाँ रख दीं

तुम उस ग़रीब की झोली में रिज़्क भी रखना
कि जिस गरीब की गोदी में बेटियाँ रख दीं

हदों को तोड़ गया यूँ गरीब बंजारा
कि शाहज़ादी के हाथों में चूड़ियाँ रख दीं

जब उन के राह के काँटे हटा नहीं पाए
तो उन के पाँव के नींचे, हथेलियाँ रख दीं

मेरी दुआ है सलामत रहे क़यामत तक
वो इश्क़ जिस ने लबों पर ये सिसकियाँ रख दीं

— Ansh Ghafil

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