उस ने वा'दा तो ये निभाया था
रोज़ ख़्वाबों में मेरे आया था
चाह कर भी मैं मर नहीं सकता
उस ने जीना मुझे सिखाया था
अब भी उस राह पर खड़ा हूँ मैं
उस ने जिस राह पर बुलाया था
अब मुझे नींद भी नहीं आती
उस ने ऐसे मुझे जगाया था
इश्क़ कितना था उस से ऐ 'आरिफ़'
मैं ने उस को नहीं बताया था
— Arif Akbarabadi














