ज़िंदा-दिली से उस ने बग़ावत नहीं करीहम ने भी फिर किसी से मोहब्बत नहीं करीइलज़ाम जितने थे वो हमीं पर लगा दिएफिर उस ने और कोई सियासत नहीं करी— Arif Akbarabadi