
बदल जाते हैं चेहरे भी बदल जाती हैं तक़दीरें
यहाँ कुछ भी हमेशा एक ही जैसा नहीं रहता
कभी हालात ऐसे भी बना देते हैं इन्साँ को
कि ख़ुद अपने ही घर में कोई भी अपना नहीं रहता
— Arman Habib
Other sher from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling