तुम बिल्कुल नादान रहोगे
मतलब के इंसान रहोगे
झूठ मिरा या फिर सच्चाई
तुम सब से अंजान रहोगे
जिस के आँसू बन जाओगे
तुम उस की मुस्कान रहोगे
महफ़िल में खुलकर बरसोगे
पर ख़ुद में वीरान रहोगे
जान रहोगे उस के दिल की
फिर भी तुम बे-जान रहोगे
कब तक आँखों में रहना है
कब तक तुम अरमान रहोगे
वही तुम्हें ख़ाली कर देगा
जिस पर तुम क़ुर्बान रहोगे
तुम कमरे भर के साथी हो
घर में तुम मेहमान रहोगे
तुम जिस के जो भी लग जाओ
तुम तो मेरी जान रहोगे
दया अगर यश पर करते हो
तुम उस का नुक़सान रहोगे
— Aryan Mishra















