Aryan Mishra

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@aryanmishra

Aryan Mishra shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aryan Mishra's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

तुझे देख कर ख़ुश बिना यश के क़िस्मत ख़ुदा जानता है मैं कैसे जिया हूँ — Aryan Mishra
तुम बहुत आगे बढ़ोगे देख लेना मीर से मीरा बनोगे देख लेना — Aryan Mishra
इश्क़ है मतलब मिरा मतलब मेरी तासीर है इक हक़ीक़त से भरी लड़की मेरी तस्वीर है — Aryan Mishra
कहाँ हम सेे दुआ होगी कहाँ नौहे पढ़ूँगा अब तुम्हें सब माँग लेंगे हम खड़े मेहराब देखेंगे — Aryan Mishra
ये दुनिया भी अजब क़िस्सों के मानी चाहती है अब किसी राँझा के हिस्से में किसी की हीर आती है — Aryan Mishra
जिन पैरों पर पैरों को अब रखते हो मेरे हाथ तो उन पाओं से जलते हैं — Aryan Mishra
प्यार मुझे सिखलाते हो सूरज को दिया दिखाते हो — Aryan Mishra
तुम जिस के जो भी लग जाओ तुम तो मेरी जान रहोगे — Aryan Mishra
अभी तुम भला कुछ कहाँ जानते हो बताओ भला तुम बुरा जानते हो — Aryan Mishra
बताओ 'यश' ज़रा कितनी अगन थी बात में उस की कभी भट्टी से निकला नर्म सा लोहा छुआ है क्या — Aryan Mishra
मृगतृष्णा की सच्चाई को झूठ बताया करते हैं कैसे कैसे लोग हैं जो पत्थर पिघलाया करते हैं — Aryan Mishra
वो टूटा बहुत है ये सच ही तो है पर न जाने मेरे गाने क्यूँ गा रहा है — Aryan Mishra

Ghazal

न तुम ने कम किया पीना तुम्हारा वहीं से रास्ता बिछड़ा तुम्हारा जो कहने लग गया हूँ अब ग़ज़ल मैं लो पूरा हो गया बदला तुम्हारा तुम्हारे बा'द जो कुछ भी बना मैं बनाने में है सब ख़र्चा तुम्हारा मैं झूठा हो गया लोगों के आगे सुनाया जब भी सच क़िस्सा तुम्हारा वो जो अब कह रहा है सब मिरा है उन्हें मालूम सब कुछ था तुम्हारा मुसलसल हम सफ़र रहने को चाहा मगर हर मोड़ था उलझा तुम्हारा मैं अपनी ज़ात से बाहर गया जब मुझे तब तब दिखा चेहरा तुम्हारा मियाँ इक उम्र तक रिश्ता चला था बड़ा मज़बूत था धोखा तुम्हारा मिरा कुछ भी नहीं था अस्लियत में जो कुछ भी है गया खोया तुम्हारा जो आँसू बह नहीं पाए कभी भी उन्हीं में गल गया रिश्ता तुम्हारा जिसे छोड़ा था तुम ने राह में ही वो मेरा साथ था साया तुम्हारा मैं हर मौसम से लड़ आया हूँ लेकिन नहीं भूला हूँ पर झोंका तुम्हारा किताबों में छुपा के रख दिया था बहुत ही क़ीमती ख़त था तुम्हारा बचा जो दर्द है सीने के अंदर उसी के नाम है हिस्सा तुम्हारा — Aryan Mishra
मेरी सच्चाई को देखो तुम्हारे ख़्वाब देखेंगे न हम बोली को देखेंगे नहीं आदाब देखेंगे तुम्हारे घर से जाने की तमन्ना भी अमल होगी तेरे कमरे में बैठे हम तेरा अस्बाब देखेंगे वो मुझ सेे पूछती है क्या करेंगे रात भर जानाॅं मैं उस सेे बोलता हूँ कुछ नहीं महताब देखेंगे हमेशा मैं ही पागल हूँ बना फिरता तेरे पीछे न जाने किस घड़ी में हम तुझे बेताब देखेंगे कहाँ हम सेे दुआ होगी कहाँ नौहे पढ़ूँगा मैं तुम्हें सब माँग लेंगे हम खड़े मेहराब देखेंगे मुझे तो फ़ख़्र मैं मुझ पे जो मैं सब देख पाया हूँ मोहब्बत में न लड़के अब तेरा तेज़ाब देखेंगे अगर दुनिया ये कल को डूबती है तुम चले आना मेरी खिड़की से बैठे साथ में सैलाब देखेंगे ज़रा यश देखना तुम भीड़ पागल नौजवानों की ये लड़के इश्क़ के प्यासे कहाँ ज़हराब देखेंगे — Aryan Mishra

Nazm

“जंग” जब राइफ़लें नहीं गाएँगी लोरियाँ और बारूद की महक को बच्चे इत्र समझ कर नहीं सूँघेंगे जब हर घर में दीवारों की जगह दरवाज़े होंगे खुले हुए तो समझ लेना जंग थक चुकी होगी जब खूँख़ार हुकूमतें किसी खेत की मेड़ पर बैठ कर फ़सलें उगाने लगेंगी और टैंकों की जगह कुआँ खोदने वाले औज़ार बाँटेंगी तो समझ लेना सियासत भी शर्मिंदा हो चली होगी जब शे'र कहने वाले ज़ख़्मों की गिनती नहीं करेंगे बल्कि मुहब्बत की बारिशों को बाँधने लगेंगे मतले में और कोई बच्चा बम की जगह काग़ज़ की नाव बनाएगा तो समझ लेना इंसानियत लौट आई होगी और हाँ जब एक शाम सीमा की दो ओर बैठे सिपाही एक ही सूरज को देख कर कहेंगे चलो घर चलते हैं तो उस दिन जंग वाक़ई ख़त्म हो चुकी होगी — Aryan Mishra