तुम बिल्कुल नादान रहोगे
मतलब के इंसान रहोगे
झूठ मिरा या फिर सच्चाई
तुम सबसे अंजान रहोगे
जिसके आँसू बन जाओगे
तुम उसकी मुस्कान रहोगे
महफ़िल में खुलकर बरसोगे
पर ख़ुद में वीरान रहोगे
जान रहोगे उसके दिल की
फिर भी तुम बे-जान रहोगे
कब तक आँखों में रहना है
कब तक तुम अरमान रहोगे
वही तुम्हें खाली कर देगा
जिस पर तुम क़ुर्बान रहोगे
तुम कमरे भर के साथी हो
घर में तुम मेहमान रहोगे
तुम जिसके जो भी लग जाओ
तुम तो मेरी जान रहोगे
दया अगर यश पर करते हो
तुम उसका नुक़सान रहोगे
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