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"आदत"
वो साथ था आबाद था
जैसे तैसे निकला ही था ख़ुद से ख़ुद को पीछे छोड़ कर
पर एक आदत से निकलने के लिए दूसरी आदत डाल ली
डाल ली फिर से आदत कुछ अटपटे से नाम देने की
काम देने की मेरी सुब्ह मेरी शाम देने की
आदत डाल ली फिर से मैं ने
निकाल ली मैं ने वो पोशाकें जो कभी दोबारा नहीं पहनने का मन बनाया था
तन नहीं सजाया था सालों से मैं ने
अरसे बीत गए थे ख़ुद को दूसरे की आँखों के पानी में देखे
पर फिर भी आदत डाल ली मैं ने
फिर से कुछ केशों को गालों पर सजाने की
फिर से इस सीने की इक तकिया बनाने की
फिर से अक्सर रात में घर देर जाने की
ग़लतियाँ सारी किसी की भूल जाने की
आदत डाल ली फिर से
Read Fullजैसे तैसे निकला ही था ख़ुद से ख़ुद को पीछे छोड़ कर
पर एक आदत से निकलने के लिए दूसरी आदत डाल ली
डाल ली फिर से आदत कुछ अटपटे से नाम देने की
काम देने की मेरी सुब्ह मेरी शाम देने की
आदत डाल ली फिर से मैं ने
निकाल ली मैं ने वो पोशाकें जो कभी दोबारा नहीं पहनने का मन बनाया था
तन नहीं सजाया था सालों से मैं ने
अरसे बीत गए थे ख़ुद को दूसरे की आँखों के पानी में देखे
पर फिर भी आदत डाल ली मैं ने
फिर से कुछ केशों को गालों पर सजाने की
फिर से इस सीने की इक तकिया बनाने की
फिर से अक्सर रात में घर देर जाने की
ग़लतियाँ सारी किसी की भूल जाने की
आदत डाल ली फिर से
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मृगतृष्णा की सच्चाई को झूठ बताया करते हैं
कैसे कैसे लोग हैं जो पत्थर पिघलाया करते हैं
कैसे कैसे लोग हैं जो पत्थर पिघलाया करते हैं
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बहुत पथरा गया हूँ मैं
समझ गर आ गया हूँ मैं
समझ गर आ गया हूँ मैं
जहाँ तुम याद करती थी
वहीं भूला गया हूँ मैं
ये तोहमत की दरारें हैं
बहुत जोड़ा गया हूँ मैं
मेरी साँसें नहीं रुकतीं
तभी उकता गया हूँ मैं
सही बातें नहीं हैं ये
ग़लत परखा गया हूँ मैं
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मैं ने सुना टूटे मकाँ आगे नहीं ढहते
मेरे दिल-ए-सहरा में क्यूँ आँसू नहीं बहते
मेरे दिल-ए-सहरा में क्यूँ आँसू नहीं बहते
लड़की बिना इक जीत के लड़की ही रहती है
लड़के हमारे हार कर लड़के नहीं रहते
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