“किताब”
एक किताब थी पास मेरे
वही जिसे पढ़ने में आलस आता था
लगता था जो हमेशा डेस्क पर रखी रहेगी
धूल खाएगी
कहाँ जाएगी
जाएगी नहीं कहीं
कौन पढ़ेगा उस किताब को
जिस
में भाव का अभाव है
झूठ का प्रभाव है
फिर एक दिन एक झूठा
मुझ से वो किताब ले गया
— Aryan Mishra















