बहुत पथरा गया हूँ मैं
समझ गर आ गया हूँ मैं
जहाँ तुम याद करती थी
वहीं भूला गया हूँ मैं
ये तोहमत की दरारें हैं
बहुत जोड़ा गया हूँ मैं
मेरी साँसें नहीं रुकतीं
तभी उकता गया हूँ मैं
सही बातें नहीं हैं ये
ग़लत परखा गया हूँ मैं
— Aryan Mishra
समझ गर आ गया हूँ मैं
जहाँ तुम याद करती थी
वहीं भूला गया हूँ मैं
ये तोहमत की दरारें हैं
बहुत जोड़ा गया हूँ मैं
मेरी साँसें नहीं रुकतीं
तभी उकता गया हूँ मैं
सही बातें नहीं हैं ये
ग़लत परखा गया हूँ मैं
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