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Kanchan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kanchan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal

Sher

समझ जाएँगी माँ की आप-बीती किसी दिन बेटियाँ जब माँ बनेंगी — Kanchan
उस ने धुएं के साथ में यादें उड़ा दीं, भूल कर सिगरेट की कश में मैं भी तो जल ही रही थी साथ में — Kanchan
नूर तो चेहरे पे अपने वो ले आई लेकिन आँखों में अब भी तुम्हें टीस दिखाई देगी — Kanchan
दुनिया को रश्क़ है मेरे बेफ़िक्र लहज़े से जैसे ग़ज़ल जले कोई आज़ाद नज़्म से — Kanchan
हाँ आज भी आती है वहाँ इश्क़ की ख़ुशबू ये तेरे मेरे जिस्म जहाँ ख़ाक हुए थे — Kanchan
लिखे लफ़्ज़ों को पढ़ कर वाह कह देती है बस दुनिया कहाँ अब पूछता कोई किसी का हाल कैसा है — Kanchan
के अपने इश्क़ का अपने ही हाथों से गला घोंटू न मैं क़ातिल नहीं हूँ यारों मुझ सेे ये नहीं होगा — Kanchan
बहा के ले गया दरिया मेरे जज़्बात सारे ही सो दिल बहलाने को अब चल तलाशें ग़म नया कोई — Kanchan
नज़्र ख़ुद को ही करेंगे हम, नया ये साल अबकी ख़त्म होगा अबकी ये औरों की ख़िदमत का तमाशा — Kanchan
अच्छी ही बात है कोई ग़म-शनास नइँ है कोई ये जानता नइँ टूटे हुए हैं हम भी — Kanchan
कहीं ऐसा न हो कि वो मुझे छूने से कतराए मेरी ख़्वाहिश छुअन उस का मुझे पाकीज़ा मत कहिए — Kanchan
देखना है अब कि कितनी दूर तक जाते हैं दोनों ये दो जुगनू जो बदलने निकले हैं तारों का लिक्खा — Kanchan
मैं क्या हूँ, कैसी हूँ, जानू मैं भी तो ये कोई तो मुझ पे भी मुझ सेे अश'आर लिखे — Kanchan

Ghazal

अलग कर दे ये दिल सीने से या फिर सर क़लम कर दे मुझे ना छोड़ ज़िदा, मार दे, मुझ पे रहम कर दे कि ऐसी ज़ीस्त भी क्या ज़ीस्त है ज़िंदा नहीं हैं हम दिखा तू मो'जिज़ा कोई, नया मेरा जनम कर दे ख़ुदा तू किस लिए नाराज़ है, क्यूँ है ख़फ़ा मुझ सेे बता तो दे मुझे मेरी ख़ता, रहम-ओ-करम कर दे बड़ी नादान है दुनिया मुझे पत्थर समझती है तू मुझ सेे इश़्क कर के दूर सबका ये भरम कर दे कि वहमी है बहुत ये दिल कोई भी रास न आया इसे है डर कोई सच में ना सच इस का वहम कर दे ख़ुदा कर के सनम को देख ना क्या हो गया कंचन सो चल इस बार तू अपने ख़ुदा को ही सनम कर दे — Kanchan