जैसे दरिया की हस्ती है पानी से
वीराने की रौनक है वीरानी से
वीराने की रौनक है वीरानी से
ख़ामोशी में बातें हो तो बेहतर है
ख़ामोशी सब कह देगी आसानी से
आँखों में आँखें डालीं तो डूबोगे
मत देखो मुझ को इतनी हैरानी से
उथला है पानी लेकिन कम मत आँको
दरिया को आँको उस की तुग़्यानी से
गहरे पानी में रक्खा था दिल मैं ने
ढूँढ़ लिया उस ने फिर भी आसानी से
ज़्यादा दानाई से रिश्ते नई बनते
उस ने मेरा दिल जीता नादानी से
पास नहीं जाना था उस के लेकिन लब
दूर नहीं रह पाए उस पेशानी से
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कि ऐसी ज़ीस्त भी क्या ज़ीस्त है ज़िंदा नहीं हैं हम
दिखा तू मो'जिज़ा कोई, नया मेरा जनम कर दे
ख़ुदा तू किस लिए नाराज़ है, क्यूँ है ख़फ़ा मुझ से
बता तो दे मुझे मेरी ख़ता, रहम-ओ-करम कर दे
बड़ी नादान है दुनिया मुझे पत्थर समझती है
तू मुझ से इश़्क कर के दूर सबका ये भरम कर दे
कि वहमी है बहुत ये दिल कोई भी रास न आया
इसे है डर कोई सच में ना सच इस का वहम कर दे
ख़ुदा कर के सनम को देख ना क्या हो गया कंचन
सो चल इस बार तू अपने ख़ुदा को ही सनम कर दे
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हाँ आज भी आती है वहाँ इश्क़ की ख़ुशबू
ये तेरे मेरे जिस्म जहाँ ख़ाक हुए थे
ये तेरे मेरे जिस्म जहाँ ख़ाक हुए थे
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