अलग कर दे ये दिल सीने से या फिर सर क़लम कर दे

मुझे ना छोड़ ज़िदा, मार दे, मुझ पे रहम कर दे

कि ऐसी ज़ीस्त भी क्या ज़ीस्त है ज़िंदा नहीं हैं हम
दिखा तू मो'जिज़ा कोई, नया मेरा जनम कर दे

ख़ुदा तू किस लिए नाराज़ है, क्यूँ है ख़फ़ा मुझ से
बता तो दे मुझे मेरी ख़ता, रहम-ओ-करम कर दे

बड़ी नादान है दुनिया मुझे पत्थर समझती है
तू मुझ से इश़्क कर के दूर सबका ये भरम कर दे

कि वहमी है बहुत ये दिल कोई भी रास न आया
इसे है डर कोई सच में ना सच इस का वहम कर दे

ख़ुदा कर के सनम को देख ना क्या हो गया कंचन
सो चल इस बार तू अपने ख़ुदा को ही सनम कर दे

— Kanchan

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