बात कर रही आँखें सुन रहा हमारा दिल
प्रेम में पड़ा तब से हो गया नकारा दिल
मैं जला रहा था दिल रौशनी सजाने को
रात चाँद ने भी जब कर लिया किनारा दिल
छोर पर गली के उस प्रेम जब लिखा मैं ने
क्यूँ नहीं भला तुम ने यार फेंक मारा दिल
बाँध खोल ज़ुल्फ़ों को खेलती कभी जो तुम
होंठ के दरीचे के आस पास हारा दिल
आजकल वफ़ा मिलती फ़ोन में किराए पर
चाहिए ख़रीदो तुम फिर करो गुज़ारा दिल
एकजुट सभी जुगनू जब हुए बहाने से
तब कहीं बना होगा आप का शरारा दिल
चार पाँच सिक्के हैं जेब में पड़े हुए
मैं ख़रीद लूँ कैसे आप का सितारा दिल
चौंक तो रहे ऐसे जानते नहीं हो कुछ
मौन है 'अमन' या'नी हो चुका ख़सारा दिल















