मैं पागल हूँ मुझे पागल बनाना छोड़ दे दुनिया
मगर कैसे सताए को सताना छोड़ दे दुनिया
मेरे दिल पे छुरी चाकू चलाना छोड़ दे दुनिया
उसी का नाम ले ले के चिढ़ाना छोड़ दे दुनिया
खड़ी रहती है मेरे दर पे क्यूँ तू हाथ फैलाए
बरा-ए-मेहरबानी आस्ताना छोड़ दे दुनिया
बढ़ेगी सर की क़ीमत और सर का मोल पाएगी
अगर दर दर पे अपना सर झुकाना छोड़ दे दुनिया
ये जीवन का सफ़र 'जस्सर' बहुत आसान हो जाए
अगर क़दमों में ठोकर बन के आना छोड़ दे दुनिया
— Avtar Singh Jasser















