तीर सब मेरे निशाने में लगे हैं
इस लिए सब जाँ बचाने में लगे हैं
तुम करो रख़्त-ए-सफ़र तय्यार यारो
हम अभी रस्ता बनाने में लगे हैं
जिन चराग़ों ने हवा से की बग़ावत
जुगनू उन की लौ बचाने में लगे हैं
हम ने तोहफ़े में दिए हैं जिनको शीशे
हम को नाबीना बनाने में लगे हैं
झूठ का पानी चढ़ाया किस ने इन पर
आइने सब सच छुपाने में लगे हैं
मेरा बनने वाला कोई भी नहीं है
सब मुझे अपना बनाने में लगे हैं
वाक़िफ़-ए-अंजाम हैं सब फूल 'जस्सर'
फिर भी काँटों से निभाने में लगे हैं
— Avtar Singh Jasser















