
शहर के रस्ते लगे जब सख़्त अपने पाँव को
हम दिवाने लौट आए फिर से अपने गाँव को
माँ के आँचल का सुकूँ भी याद आया तब हमें
याद जब हम ने किया पीपल की ठंडी छाँव को
— Avtar Singh Jasser
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