छू के तू ने अब गुलाब कर दिया
तू ने दिल का हर हिसाब कर दिया
मैं नहीं समझ किसी को आता था
तू ने चेहरा अब किताब कर दिया
जो सवाल पूछने से डरता था
तू ने हँस के अब जवाब कर दिया
ख़्वाब मैं ने सोचा था कभी वो अब
तू ने सच वो मेरा ख़्वाब कर दिया
मैं कई दिनों से था अँधेरे में
तू ने मुझ को आफ़ताब कर दिया
— Shubham Upwan














