दोस्ती में मोहब्बत को लाने लगे
ख़्वाब हम तेरे अब तो सजाने लगे
तेरी यादों का सैलाब छाया है अब
सच में हम तो मोहब्बत को गाने लगे
है नहीं कुछ भी अच्छा मगर यार अब
तेरी हाँ से तो दीपक जलाने लगे
ग़ज़लें सुनता रहा रात भर सोच कर
तुझ को पाने में मुझ को ज़माने लगे
— Shubham Upwan














