दूर जा कर भी घर नहीं छोड़ा
छोड़ सकते थे पर नहीं छोड़ा
हम-सफ़र रास्ते से लौट गए
हम ने डर कर सफ़र नहीं छोड़ा
एक दिन होगा बेड़ा पार अपना
इस लिए भी भँवर नहीं छोड़ा
कोई इक बार जो हमारा हुआ
फिर उसे उम्र भर नहीं छोड़ा
अपनी ज़िद पे अड़ा रहा वो भी
हम ने भी उस का दर नहीं छोड़ा
— Karan Bedi















