चलने से रोकनी है मुझ को हवा शाम के बा'दछत पे आती है जलाने वो दिया शाम के बा'दसारा दिन जिस को भुलाने में निकल जाता हैकरता हूँ उस से ही मिलने की दुआ शाम के बा'द— Karan Bedi