hamaara din shuroo jab aapke khayal se ho | हमारा दिन शुरू जब आपके ख़याल से हो

  - Bhuwan Singh

हमारा दिन शुरू जब आपके ख़याल से हो
हमारा सामना तब जाके इंतिक़ाल से हो

बताओ कितना कमा लेते हो मोहब्बत से
बताओ तो इसी धंधे में कितने साल से हो

अब आब-ओ-दाना भी होता है क़ैद में हासिल
परिंदा क्यूँ ही परेशान उसके जाल से हो

फिर और ठीक नहीं होगा 'इश्क़ से कोई
अगर मरीज़ों की मौतें ही देख-भाल से हो

हज़ार बार तेरा 'इश्क़ आज़माऊॅंगा
भरोसा कैसे बस इक बार इस्तिमाल से हो

  - Bhuwan Singh

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