मुझको मेरे हर सवाल का जवाब चाहिए
मुझ सेे कितना 'इश्क़ करता है हिसाब चाहिए
मैं तो चाहता हूँ तू भी काँटों से मिलाए हाथ
अब मुझे भी तेरे हाथों से गुलाब चाहिए
मुझको करना ही नहीं है तेरे हुस्न का नशा
मुझको मेरे कमरे में फ़क़त शराब चाहिए
'इश्क़ करने की सज़ा मैं ख़ुद को दे रहा हूँ और
उसको बे-वफ़ाई करने पे ख़िताब चाहिए
लड़कियाँ ही लड़कों को तबाह करती हैं मगर
अपना होने वाला इनको कामयाब चाहिए
As you were reading Shayari by Bhuwan Singh
our suggestion based on Bhuwan Singh
As you were reading undefined Shayari