maar deta hai use ya vo hi mar jaata hai | मार देता है उसे या वो ही मर जाता है

  - Bhuwan Singh

मार देता है उसे या वो ही मर जाता है
'इश्क़ जो करता है तुझ सेे वो किधर जाता है

तू भला कितनी जगह रखता है अपने दिल में
रोज़ इक शख़्स तिरे दिल में उतर जाता है

बाँट देता है मिरे हक़ की ज़मीं औरों में
रोज़ वो ख़ुद को किसी ग़ैर का कर जाता है

बस इसी डर से तिरे पास नहीं आते लोग
यार तू जिसको भी छूता है बिखर जाता है

अब तिरा नाम नहीं लेता कोई गलियों में
अब तो कुत्ता भी तिरे नाम से डर जाता है

  - Bhuwan Singh

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