वो मेरा शख़्स है पर प्यार नहीं करता है
अपने दिल को कभी गुलज़ार नहीं करता है
दिल-लगी की वो बहुत करता है बातें लेकिन
मुझ सेे तो 'इश्क़ का इज़हार नहीं करता है
मेरा दिल रब ने बनाया है उसी की ख़ातिर
दिल में रहने की वो आज़ार नहीं करता है
क़ातिलाना हैं बहुत दोस्तों उसकी आँखें
अपनी नज़रों से कभी वार नहीं करता है
यूँँ ही डरता है ज़माने से वो शायद 'दानिश''इश्क़ की राह में बेदार नहीं करता है
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