ये किसने कहा मुझ सेे बेज़ार नहीं करते
वो सामने आ कर भी दीदार नहीं करते
बातें वो बहुत मीठी करते हैं सदा हम सेे
वो प्यार के क़ाबिल हैं पर प्यार नहीं करते
गेसू में बहुत ख़ुश्बू आँखें भी नशीली हैं
क़ातिल सी अदाओं से बीमार नहीं करते
बस वस्ल की ख़ातिर अब दिल मेरा तरसता है
मिलने की वो कोशिश भी इक बार नहीं करते
वो दूर से करते हैं 'दानिश' को इशारा पर
नज़दीक कभी आ कर इज़हार नहीं करते
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