मैं बस तुम्हारा ही हूँ मुझको अजनबी न समझो तुम
मैं तुम सेे बेवफ़ा ख़फ़ा हूँ ये कभी न समझो तुम
तड़प तड़प के मर रहा हूँ जान तेरे 'इश्क़ में
ऐ मेरे यार मेरे 'इश्क़ में कमी न समझो तुम
मैं अपना सर झुकाता हूँ हमेशा तुमको देख कर
ये एहतराम को ऐ यार बंदगी न समझो तुम
बहुत ग़ुरूर है तुम्हें सनम पराए लोगों पर
रक़ीबों की ये दोस्ती को ज़िंदगी न समझो तुम
वो कुछ दिनों के बाद तुमको छोड़ जाएँगे सदा
ख़ुदा के वास्ते यूँँ इसको दिल-लगी न समझो तुम
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